Kutir Udyog क्या होता है, What is kutir Udyog In Hindi and कुटीर उद्योग के फायदे?

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Kutir Udyog क्या होता है: हमारे देश में बहुत सारे काम है जो हम सब अपने परिवारके साथ और अपने हाथो से करते है. पारिवारिक रूप से बनाया हुवा वस्तुओं सभी को काफी पसंद आता है उन में से आता है कुटीर उद्योग क्या है (Kutir Udyog kya hai)

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Kutir Udyog करके आप लाखों कमा सकते है साथी-साथ अपने और अपने देश के बिकाश में मद्दत कर सकते है| भारत सरकार द्वारा कई सारे योजना बनाने हुए है लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए|आप अपने हिसाब से कोई भी घु और कुटीर उद्योग कर सकते है|

आज की post में बताऊंगा की आखिर Kutir Udyog (कुटीर उद्योग) क्या होता है, कितने किसिम का है और कुटीर उद्योग का महत्वा क्या है ?

Kutir Udyog (कुटीर उद्योग) क्या होता है?

कुटीर उद्योग वह है जो पूर्ण रूपसे या प्रमुख रूपसे परिवार के सदस्यों द्वारा पूर्ण समय या आंशिक समय में व्यवसाय

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के रुपमे चलाया जाता है जिनमें उत्पाद एवं सेवाओं का सृजन अपने घर में ही किया जाता है न कि किसी कारखाने में.

कुटीर उद्योगों में कुशल कारीगरों द्वारा कम पूंजी एवं अधिक कुशलता से अपने हाथो के माध्यम से अपने घरे में बस्तुओं का निर्माण किया जाता है.

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भारत में प्राचीन कल से ही कुटीर उद्योगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. अंग्रेजो के भारत आगमन के पश्चात् देश में कुटीर उद्योगों तेजी से नष्ट हुए एवं परम्परागत कारीगरों ने अन्य व्यवसाय अपना लिया. किन्तु स्वदेशी आन्दोलन के प्रभाव से पुन: कुटीर उद्योगों का बल मिला और वार्तवान में तो कुटीर उद्योगों आधुनिक तकनीकी के समानान्तर भूमिका निभा रहा है. अब इनमे कुशलता एवं  परिश्रम के अतिरिक्त छोटे पैमाने पर मशीनो का भी उपयोग किया जाने लगा है.

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Types Of कुटीर उद्योग  

1. ग्रामीण कुटीर उद्योग  

2. नगरीय कुटीर उद्योग

1. ग्रामीण कुटीर उद्योग कुटीर:

उद्योग के दो प्रकारों में से एक प्रकार है. ग्रामीण कुटीर उद्योग दो प्रकार के होते है.

a. कृषि सहायक कुटीर उद्योग

b. अन्य कुटीर उद्योग

a. कृषि सहायक कुटीर उद्योग

कृषि सहायक कुटीर उद्योगों में कृषि सम्बन्धी उत्पादन ही कच्चे माल की भूमिका निभाते है. इनमें टोकरी बनाना, सूत कातना,चावल एवं ढालें तैयार करना, बीडी बनाना आदि उद्योग शामिल है.

b. अन्य कुटीर उद्योग

अन्य कुटीर उद्योग में उन उद्योग को शामिल किया जाता है जिन पर कारीगरों को जीवनका निर्भर करती है जैसे चटाई निर्माण, मिट्टी के बर्तन बनाना, लुहारी का काम या सोनारो का व्यवसाय

2. नगरीय कुटीर उद्योग

नगरीय कुटीर उद्योग कुटीर उद्योग के दो प्रकारों में से एक प्रकार है. ग्रामीण कुटीर उद्योग की भांति नगरीय कुटीर उद्योग के भी दो वर्ग है-

a. किंचित नगरीय कुटीर उद्योग

b. शहरी कुटीर उद्योग

a. किंचित नगरीय कुटीर उद्योग

किंचित नगरीय कुटीर उद्योगों में परंपरागत कुशलता एवं कारीगरी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है जैसे वाराणसी का जरी उद्योग, लखनऊ का चिकन, जयपुर की रजाइयों  का निर्माण आदि.

b. शहरी कुटीर उद्योग

शहरी कुटीर उद्योग में आधुनिकता का समावेश रहता है और ये आधुनिक यांत्रिक उद्योग की समानता करते हैं, जैसे मदुरै का हथकरघा उद्योग

कुटीर उद्योग (Kutir Udyog) के फायदे ?

1. कम पूंजी की लगत से अधिक मुनाफा

2. समाज या बाजार में अलग पहचान बनना

3. सरकारी सुबिधा का मिलना

4. कुटीर उद्योग द्वारा आर्थिक हालत में मजबूत किया जा सकता है.

5. कुटीर उद्योग करने से सस्ते दर पर मजदुर एवं कच्चा माल का मिलना

6. स्वयम पर निर्भर होना तथा एकल स्वामित्वा का होना

7. किसी के अधीन होकर काम न करना बल्कि स्वतंत्र रूप से कार्य  को बढ़ावा देना.

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Kutir Udyog (कुटीर उद्योग) को हम कही और कभी भी स्टार्ट कर सकते है, बस अगर आप एक बार स्टार्ट कर दिया तो आपको उसपे लगे रहना है और जो भी सामान बनाने की सोच रहे हो तो उसकी quality के आपको ध्यान देना होगा ताकि आगे जाकर आप उस बिज़नेस को बड़ा बना सके.

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